Thursday, December 11, 2008

मंजील

सामने पत्थर है, ये तो तेरी सिढीं है
चल पार चल आगे बढ़
रुकना नही
तू तोड़ दे हर बन्धन
खोल दे मन का आँगन
फेला ले बाहें
राहें तुझे बुलाये
भाग तू , न रुक कही
पहुचेगा तू अगर ठाना यही
मंजिल इशारा करे तुझे
बढ़ने को ही बोले तुझे
जीतेगा तू, पहचान तू
तू आगे बढ़ उड़ चल तू
तू प्यासा है तू भूखा है
पाने को मंजिल तेरी
आकाश भी तेरे साथ है
तू छोड़ न कोशिश तेरी

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